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रिसर्च में हैरान करने वाला खुलासा! देर रात तक रोशनी में जागना पड़ सकता है भारी! दिल पर पड़ता है ये असर

Health Tips: रात में सोते समय कमरे में तेज रोशनी रखना या लंबे समय तक कृत्रिम रोशनी के संपर्क में रहना दिल की सेहत के लिए नुकसान देह साबित हो सकता है। सितंबर 2026 में यूरोपियन हार्ट जर्नल (European Heart Journal) में प्रकाशित एक अध्ययन में रात के समय प्रकाश के संपर्क और हृदय की […]

Night Light Heart Risk
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Health Tips: रात में सोते समय कमरे में तेज रोशनी रखना या लंबे समय तक कृत्रिम रोशनी के संपर्क में रहना दिल की सेहत के लिए नुकसान देह साबित हो सकता है। सितंबर 2026 में यूरोपियन हार्ट जर्नल (European Heart Journal) में प्रकाशित एक अध्ययन में रात के समय प्रकाश के संपर्क और हृदय की संरचना, कार्यक्षमता तथा आगे होने वाली हृदय संबंधी बीमारियों के बीच संबंध पाया गया है।

शोधकर्ताओं ने UK Biobank के 11,071 प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इन लोगों ने सात दिनों तक ऐसा कलाई उपकरण पहना था, जिसमें रोशनी मापने वाला सेंसर भी था। अध्ययन में रात के सबसे कम सक्रिय पांच घंटों के दौरान 3 लक्स से अधिक प्रकाश के संपर्क को देखा गया और बाद में हृदय की MRI जांच से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

हार्ट फेलियर का जोखिम 29 फीसदी अधिक
अध्ययन के अलग विश्लेषण में 73,286 प्रतिभागियों के स्वास्थ्य परिणामों को 8 से 10 साल तक देखा गया। सबसे ज्यादा रात की रोशनी के संपर्क वाले ग्रुप में, सबसे कम या बिना रात की रोशनी वाले समूह की तुलना में हार्ट फेलियर का जोखिम 29 फीसदी, स्ट्रोक का 33 फीसदी और हार्ट अटैक का 24 फीसदी अधिक पाया गया। एट्रियल फाइब्रिलेशन का जोखिम 15 फीसदी और हृदय संबंधी मृत्यु का जोखिम 26 फीसदी अधिक था।

दिल की संरचना में भी दिखे बदलाव
रिसर्च में ज्यादा रात की रोशनी के संपर्क वाले प्रतिभागियों के हृदय में कुछ सूक्ष्म बदलाव भी पाए गए। ऐसे लोगों में बाएं वेंट्रिकल का आकार सूचकांक के आधार पर 2.4 फीसदी अधिक, हृदय की दीवार की औसत मोटाई 1.5 फीसदी अधिक और मायोकार्डियल कॉन्ट्रैक्शन फ्रैक्शन 1.9 फीसदी कम पाया गया। शोधकर्ताओं ने दाएं वेंट्रिकल और बाएं एट्रियम में भी कुछ प्रतिकूल बदलाव दर्ज किए।

रोशनी कैसे प्रभावित करती है?
शोध के अनुसार रात में आंखों की रेटिना पर पड़ने वाली रोशनी शरीर की सर्केडियन प्रणाली को प्रभावित कर सकती है। यह प्रक्रिया रात में मेलाटोनिन के सामान्य स्राव को दबा सकती है और शरीर की नींद-जागने की लय में बदलाव ला सकती है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि रात की रोशनी और हृदय संबंधी जोखिम के बीच संबंध का एक हिस्सा कम नींद की अवधि से जुड़ा था।

सोते समय अंधेरा रखना क्यों महत्वपूर्ण हो सकता है?
शोध के निष्कर्ष रात में पर्याप्त अंधेरा और अच्छी नींद को हृदय स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण मानने की दिशा में संकेत देते हैं। हालांकि हर व्यक्ति के लिए प्रकाश की संवेदनशीलता और स्वास्थ्य जोखिम अलग हो सकते हैं। इसलिए लगातार नींद की समस्या, हृदय संबंधी लक्षण या पहले से कोई बीमारी होने पर केवल रोशनी कम करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

क्या कहते है एक्सपर्ट?
रात के समय कृत्रिम रोशनी में रहने से शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी और हार्मोनल गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। विशेषकर सोते समय अधिक रोशनी मेलाटोनिन के सामान्य स्राव में बाधा डाल सकती है, जिससे नींद प्रभावित होती है और लंबे समय में हृदय स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना रहती है। इसलिए रात में सोते समय कमरे में अनावश्यक तेज रोशनी से बचना और अंधेरा व शांत वातावरण रखना बेहतर है। – डॉ. स्मित श्रीवास्तव, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ

रात 10 से 11 बजे के बीच सोने वालों के हार्ट को खतरा कम
ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने 88 हजार लोगों के सोने-जागने के समय के डेटा के आधार पर बताया है कि किन लोगों को हार्ट की बीमारी अगली पांच साल में हो सकती है। शोध यूरोपियन हार्ट जर्नल-डिजिटल हेल्थ में प्रकाशित हुआ है। शोध में शामिल लगभग 3.6% लोगों को आगे चलकर दिल की बीमारी हुई। इसमें स्ट्रोक, हार्ट का दौरा या दिल से संबंधित अन्य समस्याएं शामिल थीं। शोध का नतीजा यह निकला कि जो लोग नियमित रूप से रात 10 बजे से 11 बजे के बीच सोने जाते हैं, उनमें दिल की बीमारी का खतरा सबसे कम होता है।

Naveen Kumar Sahu
लेखक / पत्रकार:

Naveen Kumar Sahu

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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