Akhar Literary Event: रायपुर में अभिकल्प फाउंडेशन और प्रभा खेतान फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रसिद्ध साहित्यिक कार्यक्रम ‘आखर’ के तहत इस बार छत्तीसगढ़ी, हल्बी एवं हिंदी की प्रतिष्ठित लेखिका रजनी शर्मा बस्तरिया के साथ विशेष साहित्यिक संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान सूत्रधार गौरव गिरिजा शुक्ला ने लेखिका से उनके साहित्यिक सफर, बस्तर की संस्कृति और लेखन के विभिन्न पहलुओं पर खुलकर बातचीत की।
जगदलपुर में बीता बचपन और साहित्यकार सुंदरलाल शर्मा के वंशज होने की पृष्ठभूमि के चलते लेखिका का साहित्यिक सफर बेहद दिलचस्प रहा है। मात्र 15 वर्ष की आयु में उनकी पहली कहानी प्रकाशित हुई थी। संवाद के दौरान उन्होंने समकालीन साहित्य, सोशल मीडिया के प्रभाव और आज की युवा पीढ़ी (Gen Z) की सोच पर अपने विचार रखे।
बस्तर की पृष्ठभूमि और साहित्य की प्रेरणा
लेखिका रजनी शर्मा बस्तरिया ने बताया कि जगदलपुर में बीता उनका बचपन और परिवार की साहित्यिक विरासत ने उनके भीतर लेखन के संस्कार रोपे। वर्ष 2013 में उनका पहला कविता संग्रह ‘अंजुरी’ प्रकाशित हुआ था। बस्तर की प्रकृति और संस्कृति का उनकी रचनाओं पर गहरा प्रभाव है।
क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्य को पाठकों तक पहुंचाना चुनौती
संवाद के दौरान उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छत्तीसगढ़ी, हल्बी और गोंडी जैसी क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्य को अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचाना आज के समय में एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है।
Gen Z और सोशल मीडिया को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण
सोशल मीडिया के दौर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक प्रभावकारी माध्यम है जिसका सार्थक उपयोग होना चाहिए। उन्होंने जेन ज़ी (Gen Z) की सराहना करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी के पास अपार संभावनाएं हैं और उनकी ग्रास्पिंग पावर बहुत अच्छी है।
बाल साहित्य की स्थिति पर जताई चिंता
बाल साहित्य पर चर्चा करते हुए रजनी जी ने कहा कि बाल साहित्य व्यक्ति को उसका बचपन दोबारा जीने का मौका देता है। हालांकि, आज के समय में लेखकों और पाठकों दोनों स्तर पर बाल साहित्य की कमी चिंता का विषय है, जिसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
पात्रों और परिवेश के अनुसार होता है भाषा का चयन
भाषा के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपनी कहानियों के पात्रों और सामाजिक परिवेश के मुताबिक भाषा चुनती हैं। अपनी मातृभाषा छत्तीसगढ़ी के साथ-साथ बस्तर में पले-बढ़े होने के कारण हल्बी उनके हृदय के बेहद करीब है और उसकी मधुरता उन्हें प्रेरित करती है।
- ‘आखर’ कार्यक्रम का आयोजन अभिकल्प फाउंडेशन और प्रभा खेतान फाउंडेशन द्वारा किया गया था।
- कार्यक्रम के दौरान सूत्रधार की भूमिका गौरव गिरिजा शुक्ला ने निभाई थी।
- रजनी शर्मा बस्तरिया का पहला कविता संग्रह ‘अंजुरी’ वर्ष 2013 में प्रकाशित हुआ था।
- महज 15 वर्ष की आयु में उनकी पहली कहानी एक अखबार में प्रकाशित हुई थी।
- कार्यक्रम में मीर अली मीर, राहुल सिंह, अशोक तिवारी, उमा तिवारी, जसवंत क्लॉडियस और देवेन्द्र शुक्ला जैसे प्रबुद्ध साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।



