Women Entrepreneur Success Story: सफलता की राह में मुश्किलें आईं, कारोबार का सेटअप आग में खाक हुआ और आर्थिक चुनौतियों ने भी घेरा, लेकिन लखनऊ के अलीगंज की अपर्णा मिश्रा ने हार नहीं मानी। करीब 18 साल कॉरपोरेट जगत में काम करने के बाद उन्होंने 2008 में महिलाओं के लिए मेंटरशिप और नेटवर्किंग का काम शुरू किया। शिक्षा, ट्रेनिंग और रिक्रूटमेंट से शुरुआत करते हुए उन्होंने 100-सीटर आउटबाउंड बीपीओ खड़ा किया। सात साल तक इसे सफलतापूर्वक चलाया। बाद में आग लगने से पूरा बीपीओ सेटअप नष्ट हो गया। दोबारा शुरुआत की, लेकिन कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने से मुश्किलें और बढ़ गईं। इसी अनुभव ने उन्हें मजबूत सपोर्ट सिस्टम की अहमियत समझाई।
बीपीओ में लगी आग, फिर नए सिरे से शुरू किया सफर
अपर्णा मिश्रा की उद्यमिता यात्रा साल 2008 में शुरू हुई। उन्होंने महिलाओं के लिए मेंटरशिप और नेटवर्किंग व्यवसाय की शुरुआत की। शिक्षा, ट्रेनिंग और रिक्रूटमेंट के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने 100-सीटर आउटबाउंड बीपीओ तैयार किया। इस बीपीओ को उन्होंने करीब सात साल तक संचालित किया। इसी दौरान एक हादसे ने पूरी तस्वीर बदल दी। आग लगने से बीपीओ का सेटअप नष्ट हो गया। अपर्णा ने इसके बाद फिर से शुरुआत की। हालांकि कुछ समय बाद कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने से आर्थिक और भावनात्मक चुनौतियां बढ़ गईं। इस दौर ने उन्हें यह समझाया कि किसी भी उद्यमी के लिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम कितना जरूरी है।
आइएसबी हैदराबाद से समझी महिला उद्यमिता की बारीकियां
उद्यमिता को और बेहतर तरीके से समझने के लिए अपर्णा मिश्रा ने आइएसबी हैदराबाद के वीमेन इंटरप्रेन्योरशिप कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने आइआइटी कानपुर के इनक्यूबेशन प्रोग्राम से जुड़कर सोशल एंटरप्रेन्योरशिप स्टार्टअप्स को मेंटर करना शुरू किया। यहां उनका अनुभव सिर्फ अपने कारोबार तक सीमित नहीं रहा। वह दूसरी महिला उद्यमियों को भी आगे बढ़ाने लगीं।
कोविड के दौरान शुरू किया वीमेन शाइन चैंबर
कोविड-19 के दौर में अपर्णा मिश्रा ने वीमेन शाइन चैंबर संस्था की शुरुआत की। इसका उद्देश्य महिला उद्यमियों को बिना शुल्क मार्गदर्शन देना और उनके उत्पादों व कारोबार को लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शनियों के जरिए मंच उपलब्ध कराना था। आज उनकी संस्था से 250 से अधिक महिला उद्यमी जुड़ी हुई हैं। उन्हें यहां सहयोग के साथ नए कारोबारी अवसर भी मिल रहे हैं।
अब छोटे शहरों और गांवों की महिलाओं तक पहुंचने का लक्ष्य
अपर्णा मिश्रा का अगला लक्ष्य इस पहल को देश के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाना है। वह चाहती हैं कि वहां की महिलाएं भी अपने कौशल को कारोबार में बदल सकें और वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनें। उनका मानना है कि महिला सशक्तीकरण केवल प्रेरणा देने तक सीमित नहीं होना चाहिए। महिलाओं के काम को पहचान मिलना, उनके कारोबार को विजिबिलिटी मिलना और वित्तीय स्वतंत्रता के अवसर मिलना भी उतना ही जरूरी है।



